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रोज पूजा-पाठ करने पर भी नहीं मिल रहा मनचाहा फल तो ध्यान रखें ये खास बातें
डॉ श्रद्धा सोनी, वैदिक ज्योतिषाचार्य, रतन विशेषज्ञ

कौन नहीं चाहता भगवान हम पर प्रसन्न रहें। हर मनोकानमा पूरी हो और मनचाही खुशियां हमारे हिस्से में आए। इसी के चलते देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना की जाती है। कुछ लोग सुबह-शाम भक्ति में लीन रहते हैं, इसके बावजूद उन पर भगवान की कृपा नहीं बरसती।
पूरी श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना करने पर भी जब मनचाहा फल नहीं मिलता तब अपनी भूल समझ पाना बहुत मुश्किल होता है। ऐसे में धर्म-ग्रंथ आपकी मदद कर सकते हैं। ग्रंथों और शास्त्रों में कई ऐसी बातें बताई गई हैं, जिनका ध्यान न रखने पर पूजा व्यर्थ चली जाती है। और उसका लाभ नहीं मिल पाता।
अगर आप भी भगवान की कृपा पाने को बेताब हैं तो फिर ये लेख अंत तक जरूर पढ़ें, क्योंकि इसमें हम पूजा से संबंधित कुछ खास बातें बताने वाले हैं। जिनका ध्यान हर किसी को रखना चाहिए।
बिना नहाए न छुएं तुलसी
हिंदू धर्म में तुलसी को देवी का दर्जा दिया गया है। जिसके चलते बिना नहाए तुलसी छूने या तोड़ने की मनाही है। मान्यताओं के अनुसार, बिना नहाए तोड़ी गई तुलसी भगवान स्वीकार नहीं करते।
इस समय वर्जित है तुलसी तोड़ना?
ग्रंथों के अनुसार रविवार, एकादशी, द्वादशी, संक्रांति और शाम के समय तुलसी तोड़ने की मनाही है। ऐसा करना अशुभ फलों का कारण बन सकता है। अगर आप भी ये गलती करते हैं तो तुरंत सतर्क हो जाएं।
इस तरह न दें सूर्य देव को अर्घ्य
हिंदू धर्म में शंख का काफी महत्व है और पूजा में इसका उपयोग शुभ होता है। ऐसे में कई लोग सूर्य को अर्घ्य देने के लिए शंख का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन ये गलत है। सूर्य देव को शंख से अर्घ्य नहीं देना चाहिए। इसके लिए तांबे के लोटे का उपयोग करना शुभ होगा।
सबसे पहले करें पंचदेव की पूजा
श्रीगणेश, भगवान सूर्य, देवी दुर्गा, भगवान शिव और भगवान विष्णु को पंचदेव का दर्जा प्राप्त है। शास्त्रों के अनुसार, हवन-पूजन करने से पहले पंचदेव की पूजा करना अनिर्वाय है। अगर प्रतिदिन इनकी पूजा कर पाना संभव न हो तो इनका स्मरण करके दिन की शुरुआत करें।
दूर्वा से जुड़ी खास बातें
भगवान श्रीगणेश को दूर्वा अर्पित करना शुभ होता है लेकिन देवी दुर्गा को दूर्वा चढ़ाने की मनाही है। इसलिए भूलकर भी देवी दूर्गा की पूजा में दूर्वा का इस्तेमाल न करें। इसके अलावा रविवार को दूर्वा तोड़ने से बचना चाहिए, ऐसा करना अशुभ फलों का कारण बन सकता है।
इन धातुओं में न रखें गंगाजल
गंगाजल प्लास्टिक की बोतल, एल्युमिनियम और लोहे से बने बर्तनों में नहीं रखना चाहिए। इन सभी धातुओं को अपवित्र माना जाता है। इनकी जगह तांबे के बर्तन में गंगाजल रखेंगे तो बेहतर होगा।


